मैं जब भी उदास होता हूँ , तेरी छाया में चैन मिलता हैं।
जब कहीं न सुलझ पाऊँ प्रभू , तू ही मेरे मन की सुनता हैं।।
कहते है मानव बढ़ रहा है , विकास की अंधी दौड में।
क्या ठीक क्या गलत छोड़ इसे , भौतिकता की होड़ में।।
अपने ही हाथों अपनो को , राह में पछाड़ रहा।
आगे बढते-बढते पीछे , क्या हो रहा अनजान रहा।। १।।
मानव की ताल चॉंद पर , अब कदम बढाया मंगल पर।
किंतु प्रकृति के बिना रहना , नर्क हो जाएं धरती पर ।।
फिर क्यूँ ढोल पीट रहा है , अपने बढते कदमों से ।
क्या प्रकृति से आगे निकल सकता है , अपने धुंधले कर्मों से ।। २ ।।
यह सत्य है आज भी मानव , भ्रमण करता प्रकृति का ।
चाहे समुद्र तट हो, द्वीप समूह , विचरण करता सृष्टि का ।।
किंतु कुछ सिरफिरे लोगो ने , ईश्वर से आगे सोची है।
प्रकृति का दोहन कर करके , सारी वसुन्धरा नोची है ।। ३ ।।
वन्य प्राणी हो चाहे बाज गिद, लुप्त होते जा रहे ।
जोहड, कूप, ताल, तलैया, ढूंढे से भी नहीं पा रहे ।।
आसमां से ऊँची चिमनी , बेहाल कर रही मानव को ।
गंदे नाले -कारखाने , दूषित करते गंगा जल को।। ४।।
अब तो सद्बुधि दे दो भगवन ,मैं बढ चलूं सत्य की खोज में।
मोह-माया, लोभ-क्रोध छोड इसे, दुलार पाऊँ तेरी गोद में ।।
प्रकृति का मैं शोषक नहीं , पोषक बन आभार दूँ ।
सच्ची शान्ति,आनन्दपथ पर, जग को संग ले आगे बढूं।। ५ ।।
मेरे ब्लॉग उमेश का अखाड़ा में आप योग, साहित्य, मोटिवेशनल स्पीच, एनसीसी (आर्मी विंग), महापुरुषों के जीवन एवं देश व दुनिया के बारे में विस्तार से जानने के लिए आमंत्रित है।
शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2010
मंगलवार, 26 जनवरी 2010
चिट्ठाजगत को उमेश का प्रणाम, मेरी पहली पोस्ट
नमस्कार, मेरा नाम उमेश प्रताप वत्स है। मैं यमुनानगर का निवासी हूँ तथा हरियाणा शिक्षा विभाग में हिन्दी अध्यापक के रुप में कार्यरत हूँ। मैं ई-पण्डित श्रीश शर्मा के साथ एक ही विद्यालय में कार्यरत हूँ, हिन्दी भाषायी लेखन में रुचि रखता हूँ तो उन्होंने प्रेरित किया कि चिट्ठा लिखा करुँ। ब्लॉग वगैरा सैट करने में उन्होंने सहायता की।
ब्लॉग का नाम उन्होंने ही सुझाया, नाम के पीछे यह तथ्य है कि स्कूल में साथी अध्यापक मुझे पहलवान कहते हैं (मैं कुश्ती का राष्ट्रीय चैम्पियन रह चुका हूँ)।
उन्होंने बताया कि कविता, कहानी एवं अन्य विचार आदि लिखने के लिये ब्लॉग एक उत्तम माध्यम है। आशा है आप सब का सहयोग मिलेगा। हिन्दी टाइप करने में अभी गति नहीं है इसलिये आज इतना ही।
ब्लॉग का नाम उन्होंने ही सुझाया, नाम के पीछे यह तथ्य है कि स्कूल में साथी अध्यापक मुझे पहलवान कहते हैं (मैं कुश्ती का राष्ट्रीय चैम्पियन रह चुका हूँ)।
उन्होंने बताया कि कविता, कहानी एवं अन्य विचार आदि लिखने के लिये ब्लॉग एक उत्तम माध्यम है। आशा है आप सब का सहयोग मिलेगा। हिन्दी टाइप करने में अभी गति नहीं है इसलिये आज इतना ही।
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